अनेक भाषाओँ के ज्ञाता तथा साहित्य सृजन ,लेखन की महनीय विभूति के साथ ही देशप्रेम के ज़ज्बे से ओतप्रोत हमारे एक वीर सेनानायक (पुलिस उपाधीक्षक ) परम श्रद्धेय हुकम सिंह 'जमीर' जिनके कृतित्व में जिज्ञासुओं ,विद्वानों ,पाठकों के ह्रदय को आप्यायित करने की अतीव क्षमता विद्यमान है ;आपने किसी विषय और परिस्थिति को दृष्टिबाह्य न करते हुए लगभग हर पहलुओं पर अपनी लेखनी चलाई है ,क्या राजनीति ,क्या प्रेम ,क्या रिश्ते ,क्या आध्यात्म ,क्या देशप्रेम ,क्या मनुष्यता ; किंबहुना कौन सा वह क्षेत्र है जो आपकी लेखनी में समाहित नहीं हो गया है। किसी भी देश ,जाति का वर्ग आपसे अनुप्राणित हुए बिना नहीं रह सकता ,आपकी रचनाओं /विचारों को पढ़कर आध्यात्मिकता ,देशप्रेम व मनुष्यता की उच्च भावना हिलोरें मारने लगती है। हमारे देश में जीवन के उपकरणों का सौलभ्य होने के कारण हमारा समाज जीवन संग्राम के विकट संघर्ष से अपने को पृथक रखकर आनन्द की अनुभूति को ,शाश्वत आनन्द की अनुभूति को अपना लक्ष्य मानता है ,इसीलिये काव्य सदा जीवन की विषम परिस्थितियों के भीतर से आनन्द की खोज में संलग्न रहा है। पाठकों के ह्रदय में आनन्द ,रसानुभूति का उन्मेष ही काव्य का अन्तिम लक्ष्य है और आदरणीय हुकम सा हर अवसर पर इस लक्ष्य को प्राप्त करते दिखाई देते हैं। आदरणीय मनु भारद्वाज सा को भी हार्दिक धन्यवाद इस अमूल्य निधि 'आवाज -ए -जमीर' के प्रकाशनार्थ ! मैं बहुत ही अल्पज्ञ हूँ इस सागर समान गहराई वाले भण्डार से जो भी ग्रहण कर सका , मेरा सौभाग्य है। पुनः 'आवाज़ -ए-ज़मीर' के लिए अपनी कोटिशः शुभकामनायें प्रेषित करते हुए हुकम सा को सादर नमन करता हूँ और परम पिता परमेश्वर से प्रार्थना भी करता हूँ कि आप दीर्घायु होकर हम सबको अपनी साहित्यसुधा से ऐसे ही सिञ्चित करते रहें ।
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