अशोक चक्रधर बनाम कुमार विश्वास।
मालूम हो कि दिल्ली में सत्ता हस्तान्तरण होते ही अशोक चक्रधर ने हिन्दी साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे दिया था उन्होंने त्यागपत्र तकरीबन दो हफ्ते पूर्व दिया था लेकिन अभी तक उनका त्यागपत्र स्वीकृत नहीं किया गया था और न ही इस बाबत उन्हें कोई सूचना ही मुहैया करायी गयी उन्हें अतीव आश्चर्य उस समय हुआ जब उन्हें हिन्दी साहित्य आकदमी के वार्षिक समारोह का आमन्त्रण पत्र मिला और उसमे उपाध्यक्ष की जगह पर डॉ कुमार विश्वास का नाम था। चक्रधर साहब इस बात से हैरान हैं कि उनके त्यागपत्र की स्वीकृति या अस्वीकृति के बारे में उन्हें क्यूँ नहीं सूचित किया गया जबकि लगभग पाँच दशकों से इस संस्था से जुड़े अशोक चक्रधर ने मुख्यमन्त्री श्री अरविन्द केजरीवाल को इस विषय में दो बार चिट्ठी भी लिखी थी ,
अमेठी में राहुल गांधी को चुनौती देने में जुटे कुमार विश्वास से पूछा गया तो उन्होंने कहा, "अशोक जी सरकार के बहुत करीब रहे हैं. कपिल सिब्बल की कविताओं का अनुवाद किया है, पर सड़क पर उतर कर कभी संघर्ष नहीं किया. वह लाल बत्ती की गाड़ी में घूमते हैं. सारी सुविधाएं मिली हैं और अगर उन्हें बहुत तकलीफ हो रही है तो मैं अरविंद से बात करके वो वापस दिला दूंगा."
चक्रधर पर कुमार विश्वास ने कहा, "मैं उनसे महंगा कवि हूं.' अकादमी के काम-काज पर इस बवाल का क्या असर होगा, यह देखना अभी बाकी है. पर जो कुछ भी हो रहा है उसका कविता या साहित्य से कितना लेना-देना है, आप भी जानते हैं"
अकादमी का वार्षिक समारोह 16 जनवरी को लाल किले पर होना है..............
उपर्युक्त विषय पर आपकी प्रतिक्रिया का आकांक्षी।
डॉ.धीरेन्द्र नाथ मिश्र 'धीरज '
'स्वतन्त्र पत्रकार'
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