सत्यमेव विजयते !
हमारे लोकतन्त्र के चौथे स्तम्भ मीडिया की दुर्दशा देखकर मन बड़ा क्षुब्ध हो गया है।
जब जो करना चाहिए ,जब जो कहना चाहिए के एकदम उलट चल रहे मीडिया का रुख दिनोंदिन बदतर होता जा रहा है ,देशहित /राष्ट्रहित में जब जो बोलना चाहिए वह भी कोई और तय कर रहा है हमारे कलम के सिपाहियों के लिए……………………आप सब साक्षी हैं इसके कि चीन और पाकिस्तान की घिनौनी हरकतें दिनों-दिन बढती जा रही हैं , देश में भ्रष्टाचार ,हत्या ,बलात्कार की घटनाओं में दिन-प्रतिदिन इजाफा हो रहा है ,हमारी अर्थव्यवस्था कोमा में है ……………………… बजाय इसके हमारी मीडिया का मुख्य विषय -मोदी,काला जादू ,और भारत निर्माण है।
क्या कहेंगे आप? मैं मीडिया के सर्वोच्च संस्थान का अंग रहा हूँ ,लेकिन मैंने क्या- क्या देखा ?क्या -क्या सुना ये वर्णन करने योग्य नहीं है ,भ्रष्टाचार और अनाचार की जड़ें इस हद तक गहराई में जा चुकीं हैं की इसे चाहकर भी उखाड़ना मुश्किल सा होता जा रहा है ,और हो भी क्यूँ न ,कोई सम्मिलित तरीके से कुछ करना ही नहीं चाहता है ,बात अगर देश की भी होगी तब भी हर किसी के मन में श्रेय का चित्रण होता रहता है ,हर कोई अपना -अपना राग अलाप रहा है लेकिन परिणाम सिफर है …. इसी क्रम में अन्ना हजारे जी ने एक ठोस पहल करी जिसके फलस्वरूप उन्हें व्यापक जनसमर्थन मिला ,लेकिन अत्यंत ही दुःख का विषय है की वह आन्दोलन भी अलग-थलग पड़ गया और राजनीति की भेंट चढ़ गया कालान्तर में उस राजनीति के बीजान्कुरण से अरविन्द केजरीवाल ,डॉ विश्वास ,मनीष सिसौदिया जैसी कपोलें निकली जो अब उन्ही पार्टियों के साथ चुनाव लड़ने की बात कर रहें हैं जिसके वे धुर विरोधी कहे जाते थे (क्यूंकि उनकी नज़र में अब वो शायद भ्रष्ट नहीं रहीं )…………………….
खैर मुख्य विषय पर आते हैं मीडिया में भी मैंने इतना भ्रष्टाचार और शोषण देख लिया (२००२ से आज तक भर में ) कि आज पूरे होशोहवास में मैं डॉ. धीरेन्द्र नाथ मिश्र अपने समस्त वैतनिक -अवैतनिक पदों से त्यागपत्र देता हूँ।
और यह शपथ भी लेता हूँ की जब तक जियूँगा अपने देश के लिए कलम की लड़ाई लड़ता रहूँगा ,मैं हमेशा स्वतन्त्र लेखन करता रहूँगा और अपनी कलम की धार को इतना पैना कर दूँगा की शायद मेरी मुहिम कुछ काम आ सके मेरे देश के । वो कहते हैं न कि.……….
सहादत से आदत एवादत से इल्म ,
हुकूमत है दौलत है ताक़त है इल्म,
जाके पूँछो किसी मर्द मुख्तार से ,
कलम तेज चलती है तलवार से ,
आप सबके मार्गदर्शन एवं स्नेह का सदा आकांक्षी रहूँगा। प्रयास यही होगा की देशहित सर्वोपरि हो !
हम रहें न रहें यह देश रहे।
जय माँ भारती ! वन्दे मातरम।
(मेरे कथन का केन्द्र केवल भ्रष्ट लोग हैं ,मीडिया और उसके बाहर के कलम के वीर सिपाहियों की वंदना में मेरा शीश सदैव नतमस्तक रहेगा। )
हमारे लोकतन्त्र के चौथे स्तम्भ मीडिया की दुर्दशा देखकर मन बड़ा क्षुब्ध हो गया है।
जब जो करना चाहिए ,जब जो कहना चाहिए के एकदम उलट चल रहे मीडिया का रुख दिनोंदिन बदतर होता जा रहा है ,देशहित /राष्ट्रहित में जब जो बोलना चाहिए वह भी कोई और तय कर रहा है हमारे कलम के सिपाहियों के लिए……………………आप सब साक्षी हैं इसके कि चीन और पाकिस्तान की घिनौनी हरकतें दिनों-दिन बढती जा रही हैं , देश में भ्रष्टाचार ,हत्या ,बलात्कार की घटनाओं में दिन-प्रतिदिन इजाफा हो रहा है ,हमारी अर्थव्यवस्था कोमा में है ……………………… बजाय इसके हमारी मीडिया का मुख्य विषय -मोदी,काला जादू ,और भारत निर्माण है।
क्या कहेंगे आप? मैं मीडिया के सर्वोच्च संस्थान का अंग रहा हूँ ,लेकिन मैंने क्या- क्या देखा ?क्या -क्या सुना ये वर्णन करने योग्य नहीं है ,भ्रष्टाचार और अनाचार की जड़ें इस हद तक गहराई में जा चुकीं हैं की इसे चाहकर भी उखाड़ना मुश्किल सा होता जा रहा है ,और हो भी क्यूँ न ,कोई सम्मिलित तरीके से कुछ करना ही नहीं चाहता है ,बात अगर देश की भी होगी तब भी हर किसी के मन में श्रेय का चित्रण होता रहता है ,हर कोई अपना -अपना राग अलाप रहा है लेकिन परिणाम सिफर है …. इसी क्रम में अन्ना हजारे जी ने एक ठोस पहल करी जिसके फलस्वरूप उन्हें व्यापक जनसमर्थन मिला ,लेकिन अत्यंत ही दुःख का विषय है की वह आन्दोलन भी अलग-थलग पड़ गया और राजनीति की भेंट चढ़ गया कालान्तर में उस राजनीति के बीजान्कुरण से अरविन्द केजरीवाल ,डॉ विश्वास ,मनीष सिसौदिया जैसी कपोलें निकली जो अब उन्ही पार्टियों के साथ चुनाव लड़ने की बात कर रहें हैं जिसके वे धुर विरोधी कहे जाते थे (क्यूंकि उनकी नज़र में अब वो शायद भ्रष्ट नहीं रहीं )…………………….
खैर मुख्य विषय पर आते हैं मीडिया में भी मैंने इतना भ्रष्टाचार और शोषण देख लिया (२००२ से आज तक भर में ) कि आज पूरे होशोहवास में मैं डॉ. धीरेन्द्र नाथ मिश्र अपने समस्त वैतनिक -अवैतनिक पदों से त्यागपत्र देता हूँ।
और यह शपथ भी लेता हूँ की जब तक जियूँगा अपने देश के लिए कलम की लड़ाई लड़ता रहूँगा ,मैं हमेशा स्वतन्त्र लेखन करता रहूँगा और अपनी कलम की धार को इतना पैना कर दूँगा की शायद मेरी मुहिम कुछ काम आ सके मेरे देश के । वो कहते हैं न कि.……….
सहादत से आदत एवादत से इल्म ,
हुकूमत है दौलत है ताक़त है इल्म,
जाके पूँछो किसी मर्द मुख्तार से ,
कलम तेज चलती है तलवार से ,
आप सबके मार्गदर्शन एवं स्नेह का सदा आकांक्षी रहूँगा। प्रयास यही होगा की देशहित सर्वोपरि हो !
हम रहें न रहें यह देश रहे।
जय माँ भारती ! वन्दे मातरम।
(मेरे कथन का केन्द्र केवल भ्रष्ट लोग हैं ,मीडिया और उसके बाहर के कलम के वीर सिपाहियों की वंदना में मेरा शीश सदैव नतमस्तक रहेगा। )
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