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Saturday, May 12, 2012

है शुभाशंसा बहे मन में तुम्हारे ज्ञान धारा;
कारयित्री शेमुषी से हो चमत्कृत विश्व सारा;
आगमन शुभ हो तुम्हारा भारती के इस भवन में ;
हम सभी की ओर से है नवसुह्रित स्वागत तुम्हारा;

हम सभी ने जीवनोदधि में अलग गोता लगाया;
मिल गया कोई नया तो हो गया कोई पराया;
कष्टकर लम्बा सफ़र मंजिल अभी भी दूर थी पर;
इस जलधि की वीचियों ने हम सभी को ला मिलाया;
है खड़ा बाहें पसारे सामने फिर सिन्धु सारा;

जिंदगी की वीथियों में कुछ स्वजन तो छूटते हैं;
किन्तु उनकी याद के पल चैन मन का लूटते हैं;
और आँखों में अनागत के लिए सपने सुहाने ;
हम भले ही दूर होते किन्तु दिल तो टूटते हैं;
तुम मिले तो यूँ लगा ज्यों मिल गया परिवार सारा;
हम सभी की ओर से है नवसुह्रित स्वागत तुम्हारा............

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